कथालेख / अंक – 02 / फरवरी, 2023

अनुक्रमणिका

  1. तुम ही दिल को तोड़ गये / वीर बहादुर सिंह
  2. लोगों का काम है कहना / पूजा गुप्ता
  3. दामन पर दाग लगने नही दिये / हितेन्द्र
  4. गृहस्थी / राजेन्द्र
  5. आया है मधुमास /विनय बंसल
  6. रिश्तो का आजमाया नही करते / सुशील यादव साँझ
  7. आजादी की कीमत / शालू मिश्रा
  8. प्रेम प्रतिक्षा / नमिता चौहान
  9. गजल / विश्वदीप जून
  10. वेलेंटाइन डे / नागेश
  11. मौसम की लिखावट / गोपाल सिन्हा
  12. गजल / दीपक वर्मा मीर
  13. बूढ़े बाबा / दीपक विकल
  14. माँ की याद / अरूण शर्मा
  15. नागवार / आशा पाण्डेय
  16. बंसत राग सुनाते हैं / मोहित त्रिपाठी
  17. हर रोज / यू एस बरी
  18. समझौते / पी अतुल ‘बेतौल’
  19. समीक्षा / गोपाल सिन्हा
  20. जिन्दगी का एहसास / इच्छा पोरवाल
  21. सूकून के आँसू / शशिलता पाण्डेय
  22. नया साल / अग्यार विश्नोई’
  23. सड़क पर लड़की /इन्दु सिन्हा “इन्दु”
  24. लक्ष्मण धामी “मुसाफिर”
  25. रंगरसिया/डॉ. राज करन द्विवेदी
  26. चलो चले / शिवम् मिश्रा
  27. आया राज बसंत /के एल महोबिया
  28. पाश / रुचि ‘अग्निरेखा’
  29. बुजुर्ग / महेन्द्र सिंह कटारिया “विजेता”
  30. इंतज़ार / ऋतु गुप्ता

तुम ही दिल को तोड़ गये

तुमने इश्क सिखाया मुझको और जगाया रातों में ।
कितना इश्क छुपा है दिल में मुझे बताया बातों में ।।
फिर भी कैसे बदल गये तुम छोड़ मुझे तन्हाई में ।
कौन किसे समझा है लेकिन चन्द सहज मुलाकातों में ।।

हो कैसे निर्मम तुम मेरा ग़म से रिश्ता जोड़ गये।
तुमने ही तो इश्क किया था तुम ही दिल को तोड़ गये ।।1।।

तुम आते थे मुझसे मिलने तुम कितना शरमाते थे ।
बेशक मुझको देख दूर से तुम बेहद मुस्क्याते थे ।।
जब छूती थी नज़र मेरी उन मस्त गुलाबी गालों को ।
उस वक्त पता है ना तुमको तुम कैसे वहीं लजाते थे ।।

और आज मैं देख रहा हूॅं तुम किस गति से दौड़ गये।
तुमने ही तो इश्क किया था तुम ही दिल को तोड़ गये ।।2।।

कितने सारे वायदे थे कितने उपहार सजाये थे ।
किस किस हिस्से में तुम हो दिल के सब राज बताये थे।
एक तुम्हें पा जाऊॅं मैं इस भीड़ भरी दुनिया में से ।
केवल इस खातिर तुमसे कितने मनुहार लगाये थे।।

इतने पर भी प्यार मेरे तुम अपनी नज़रें मोड़ गये ।
तुमने ही तो इश्क किया था तुम ही दिल को तोड़ गये ।।3।।

कहते थे तुम सा दिल प्यारा अभी तलक तो पाया ना ।
जितना तुम पर आया है दिल किसी और पर आया ना।।
मुझे छोड़ जाने के डर से ही तो तुम डर जाते थे ।
फिर भी कैसे बहक गया दिल क्यों तुमने समझाया ना।।

पता नहीं तुम कितना खुश हो पर मुझको तो छोड़ गये ।
तुमने ही तो इश्क किया था तुम ही दिल को तोड़ गये ।।4।।

©वीर बहादुर सिंह
हाथरस, उत्तरप्रदेश

कथालेख/ अंक – 01/ जनवरी, 2023

अनुक्रमणिका

  1. दीवाना / शीला गौरभि
  2. संबंध सुहाना/ लीला तिवानी
  3. शीत ऋतु/ देवेंद्र देशज
  4. पैसा, माँ और मैं / गिरिराज पांडे
  5. मौन अखरता है / आलोकेश्वर चबडाल
  6. जाते हुए बरस से /नमिता गुप्ता ‘मनसी’
  7. खोजता हूँ / मदन मोहन शर्मा’सजल’
  8. महंगाई की मार /मुदित अग्रवाल बिसौली
  9. मोबाइल और बच्चे / डॉ राम शरण सेठ
  10. गाँव जा रहा हूँ / सुधिर भगत
  11. ये रिश्ते / अजित कुमार ‘कर्ण’
  12. आना तुम बनके बहार / अपराजिता रंजना
  13. पूर्णिका/सच्चिदानंद किरण
  14. निरूपम गाँव पुलासर /महावीर जोशी लेखाकार
  15. विस्तार / कवि यू एस बरी
  16. स्मृति मेरे गाँव की / सुभाष’ धूलमाटी’
  17. तुम और मैं / अनमोल दिवाकर
  18. जिस नगरी की गलियों में /त्रिशिका श्रीवास्तव ‘धरा’
  19. क्रोध/ नरेंद्र पाठक बिसौली
  20. हाँ प्राण तुझे चलना होगा / अशोक दीप
  21. नए वर्ष में एक आशा /महेश शर्मा
  22. इश्क़ (गज़ल) / मन्तशा शायरा
  23. मत बांटो इंसान को/ गोविंद सरावत मीना ‘गोविनी’
  24. धर्म की धारणा / गोपाल सिन्हा
  25. गूरू क्या होते हैं / इन्द्र जीत सिहाग
  26. प्रियपथिक / नमिता चौहान
  27. तुम और मैं संग संग / प्रवीण कुमार श्रीवास्तव
  28. वनप्रिया ने गाया गाना /शशिलता पाण्डेय
  29. क्रिसमस के रंग / सृष्टि देशमुख
  30. कृष्णा अर्जुन / अनामिका संजय अग्रवाल
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